उज्जैन। हाल ही में दिसंबर से जनवरी एवं मार्च से अप्रेल मास तक मलमास के कारण विवाह एवं शुभ काम रूके रहे। अब एक बार फिर से एक माह के लिए अधिकमास के कारण यह रोक प्रभावी हो जाएगी। 17 मई से अधिकमास की शुरूआत होगी जो 15 जून तक मान्य रहेगी। अधिकमास में भगवान पुरूषोत्तम का ध्यान दान एवं धर्म की स्थिति रहती है। अधिकमास में विवाह एवं अन्य शुभ कार्य मान्यता अनुरूप नहीं किए जाते हैं।
आचार्य पं. प्रणयन पाठक के अनुसार हर तीसरे वर्ष अधिकमास की स्थिति बनती है। इस बार अधिकमास में दो ज्येष्ठ मास आ रहे हैं। मलमास स्थाई होता है। प्रति वर्ष दिसंबर से जनवरी एवं मार्च से अप्रेल में यह होता है।पंचांग के हिन्दी मास में दो ज्येष्ठ मास की स्थिति रहने से यह दान,धर्म एवं ध्यान का मास माना जाता है। इस दौरान भगवान श्री पुरूषोत्तम नारायण भगवान का पूजन अर्चन किया जाता है। श्री मद् भागवत कथा का श्रवण किया जाता है। शुभ कार्य किए नहीं जाते हैं।
इसलिए अधिकमास-
जब सूर्य का किसी एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश नहीं होता तब अधिक मास माना जाता है। इसका मतलब यह है कि सूर्य का नक्षत्र परिवर्तन न करना धार्मिक दृष्टि से अशुभ माना गया है। साल 2026 में जल्दी अधिक मास प्रारंभ होने जा रहा है। इस समय में शुभ काम नहीं किए जाते हैं।
इस दौरान मुंडन, विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कामों को मान्यता के अनुसार नहीं किया जाता है।
17 मई से 15 जून अधिकमास-
पंचांग के मुताबिक इसकी शुरुआत 17 मई से होकर 15 जून एक महीना चलने वाला है। ऐसा कहते हैं कि इस दौरान सूर्य की गति धीमी हो जाती है जो मांगलिक कामों के लिए अच्छी नहीं मानी जाती इसलिए इन पर रोक होती है।
ये कार्य अमान्य-
- इस दौरान शादी विवाह नहीं किए जाते। मान्यता है इस दौरान के विवाहों में क्लेश बना रहता है।
- नए घर में प्रवेश या फिर नींव पूजन के लिए शुभ नहीं माना जाता है।
- जनेऊ संस्कार भी इस अवधि में नहीं किए जाते।
- प्रतिष्ठान कारोबार की शुरुआत नहीं की जाती,आर्थिक संकट गहरा सकता है।
ये कार्य मान्य-
- अधिकमास भगवान विष्णु को समर्पित है। यह पुरुषोत्तम मास के नाम से प्रसिद्ध है। इस समय श्री हरि विष्णु की पूजा लाभकारी है।
- इस महीने में जल, अनाज और तिल का दान फलदायक है।
- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जाप मानसिक शांति के लिए किया जाता है।
- इस माह में तामसिकता से दूरी बनाते हुए पूरी तरह से सात्विक भोजन करना चाहिए।